HCL की नौकरी छोड़ी, पटना से खड़ा किया 8 प्लेटफॉर्म वाला LivestockTech साम्राज्य
जब देश के सबसे बड़े स्टार्टअप फूड डिलीवरी और फिनटेक बना रहे थे, तब बिहार का एक इंजीनियर उस सेक्टर में उतरा जिसे सबने 'अनसेक्सी' कहकर छोड़ दिया था — भारत की ₹15 लाख करोड़ की लाइवस्टॉक इकोनॉमी।
पटना के इंजीनियर विशाल कुमार गुप्ता के पास वह सब कुछ था जो एक मिडिल-क्लास परिवार का सपना होता है — HCL Software में स्थिर नौकरी, कॉर्पोरेट करियर, महानगर की जिंदगी। लेकिन 2017 में उन्होंने वह फैसला लिया जिसे उस वक्त लोगों ने "पागलपन" कहा — नौकरी छोड़कर बिहार लौटना, और वह भी पशुपालन जैसे सेक्टर में स्टार्टअप शुरू करने के लिए।
आज, लगभग 8 साल बाद, उनकी कंपनी OYMOM Health Private Limited — DPIIT-मान्यता प्राप्त, RKVY-RAFTAAR फंडेड और NIAM जयपुर में इनक्यूबेटेड — आठ ऑपरेशनल प्लेटफॉर्म्स का कनेक्टेड इंफ्रास्ट्रक्चर चला रही है।
वह समस्या जिसे किसी ने 'प्रॉब्लम' माना ही नहीं
भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है। देश में 30 करोड़ से अधिक गोवंश हैं। लेकिन गांव में जब आधी रात को किसी किसान की गाय बीमार पड़ती है, तो उसके पास कोई 'एम्बुलेंस', कोई हेल्पलाइन, कोई डॉक्टर-ऑन-कॉल नहीं होता। एक पशु की मौत का मतलब है — एक परिवार की सालों की बचत का खत्म हो जाना।
"इंसानों के लिए 108 है, ऐप्स हैं, टेलीमेडिसिन है। लेकिन जिस पशु पर करोड़ों परिवारों की रोज़ी टिकी है, उसके लिए कुछ नहीं। हमने यहीं से शुरुआत की।"
एक नहीं, आठ प्लेटफॉर्म — एक कनेक्टेड सिस्टम
AI-आधारित इमरजेंसी वेटरनरी डिस्पैच। 5-स्तरीय प्रोटोकॉल: AI ट्राइएज → फील्ड डिस्पैच → AI-असिस्टेड डायग्नोसिस → डॉक्टर RX अप्रूवल (VCI Act 1984 कंप्लायंट) → फार्मेसी फुलफिलमेंट व D+3/D+7 फॉलो-अप। 500+ पिनकोड, Jitsi टेलीमेडिसिन।
भारत का पहला सॉवरेन लाइवस्टॉक फाउंडेशन AI — 1.1 बिलियन पैरामीटर, हिंदी + 12 क्षेत्रीय भाषाओं में voice-to-voice वेटरनरी ट्राइएज। "यह कोई GPT रैपर नहीं है।" 2027 कमर्शियल लॉन्च।
रियल-टाइम ज़ूनोटिक डिज़ीज़ सर्विलांस। हर 3 घंटे में जिला-स्तरीय रिस्क स्कोरिंग और पेटेंट-फाइल्ड Animal Health Credit Score (0–850)। रिसर्च Frontiers in Veterinary Science में सबमिट।
भारत का पहला लाइवस्टॉक गिग-इकोनॉमी प्लेटफॉर्म — PSFARM UID, QR वाले Digital Pashu ID, 30 मिनट में जियो-फिल्टर्ड डिस्पैच। पशु सेवा के साथ ग्रामीण रोज़गार भी।
बिहार का सब्सक्रिप्शन-आधारित पशु स्वास्थ्य नेटवर्क — प्रिवेंटिव प्रोटोकॉल, टेली-ट्राइएज और ऑन-कॉल विज़िट, 2017 से।
देसी नस्लों की जीनोमिक इंटेलिजेंस — Breed DNA Ledger और GauVansh Score, जो नस्ल शुद्धता, दूध परफॉर्मेंस और रोग-प्रतिरोधक क्षमता को साइंटिफिक स्कोर में बदलता है।
AI-पावर्ड SPS सर्टिफिकेट जनरेशन, APEDA सिंक, ICEGATE इंटीग्रेशन — मीट, डेयरी व लाइव एनिमल एक्सपोर्ट की बैच-लेवल ट्रेसेबिलिटी।
OYMOM Foundation के तहत भारत का पहला ऑटोनॉमस मल्टी-एजेंट AI न्यूज़रूम — 10 AI एजेंट, 24×7 एडिटोरियल, रिसर्च और फैक्ट-चेक।
बिहार से क्यों? — 'यही तो असली मार्केट है'
"जिस किसान के लिए प्रोडक्ट बना रहे हो, उससे 1500 किलोमीटर दूर बैठकर उसे नहीं समझ सकते। बिहार में बैठकर बनाया गया प्रोडक्ट पूरे भारत के गांव में चलेगा — उल्टा नहीं।"
यह 'Bharat-first' अप्रोच ही OYMOM की सबसे बड़ी ताकत बनी — मोबाइल-फर्स्ट PWA टेक्नोलॉजी, हिंदी इंटरफेस, WhatsApp नोटिफिकेशन और गांव के लोकल एजेंट। तकनीकी बैकबोन कंपनी की IT विंग SUBHII.AI (Nexinfo IT Solution) संभालती है, और पशु स्वास्थ्य उत्पाद OYMOM Webstore से सीधे किसानों तक पहुंचते हैं।
आगे क्या? — 'सॉवरेन AI' का दांव
OYMOM का अगला बड़ा लक्ष्य NandiBaba.AI का 2027 कमर्शियल लॉन्च है — भारतीय पशुओं के डेटा पर, भारतीय भाषाओं में, भारत में ट्रेन हुआ AI। अगर यह दांव चला, तो बिहार का यह स्टार्टअप वह कर सकता है जो अमूल ने डेयरी में किया — किसान को टेक्नोलॉजी का मालिक बनाना, सिर्फ यूज़र नहीं।
"लोग पूछते हैं कि पशुओं के लिए AI क्यों? मैं कहता हूं — क्योंकि इस देश में गाय-भैंस सिर्फ जानवर नहीं, करोड़ों परिवारों का ATM है। और हम उस ATM को कभी बंद नहीं होने देंगे।"